AMR – एक ‘मूक महामारी’ (World Antimicrobial Awareness Week: AMR – A ‘Silent Pandemic’)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance – AMR) को मानवता के सामने आने वाले शीर्ष 10 वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक घोषित किया है। आज, 18 नवंबर से शुरू हो रहे विश्व रोगाणुरोधी जागरूकता सप्ताह (WAAW) का उद्देश्य इस बढ़ते खतरे के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। विशेषज्ञों ने इसे ‘मूक महामारी’ (Silent Pandemic) की संज्ञा दी है क्योंकि कोविड-19 के विपरीत, इसका प्रभाव तत्काल दिखाई नहीं देता, लेकिन यह धीरे-धीरे हमारी स्वास्थ्य प्रणाली की नींव को खोखला कर रहा है।
18-24 नवंबर, 2025 के सप्ताह को वैश्विक स्तर पर AMR के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जा रहा है। इस वर्ष का फोकस “शिक्षित करें। वकालत करें। अभी कार्य करें।” (Educate. Advocate. Act now.) है।
हाल ही में लैंसेट (The Lancet) की एक रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक AMR के कारण सालाना 1 करोड़ से अधिक लोगों की मृत्यु हो सकती है। भारत, जिसे अक्सर ‘विश्व की एंटीबायोटिक राजधानी’ कहा जाता है, विशेष रूप से खतरे में है क्योंकि यहाँ संक्रामक रोगों का उच्च बोझ और एंटीबायोटिक दवाओं का अनियमित उपयोग दोनों मौजूद हैं।

AMR क्या है?

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी समय के साथ बदलते हैं और उन दवाओं का जवाब नहीं देते जो संक्रमण के इलाज के लिए बनाई गई थीं। इसका परिणाम यह होता है कि सामान्य संक्रमणों का इलाज करना कठिन या असंभव हो जाता है। ऐसे प्रतिरोधी सूक्ष्मजीवों को ‘सुपरबग्स’ (Superbugs) कहा जाता है।

AMR के प्रमुख कारण:

  1. एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग: सर्दी-जुकाम (वायरल संक्रमण) के लिए एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक सेवन।
  2. पशुधन में उपयोग: पोल्ट्री और पशुपालन में विकास को बढ़ावा देने (Growth Promoters) के लिए एंटीबायोटिक्स का अंधाधुंध प्रयोग।
  3. खराब स्वच्छता: अस्पतालों और समुदायों में संक्रमण की रोकथाम का अभाव, जिससे प्रतिरोधी बैक्टीरिया फैलते हैं।
  4. फार्मास्युटिकल अपशिष्ट: दवा निर्माण इकाइयों से निकलने वाला अनुपचारित अपशिष्ट जो जल स्रोतों में मिलता है।

Key Policy Highlights

AMR से निपटने के लिए भारत और वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं:

  • वैश्विक कार्य योजना (Global Action Plan – GAP): WHO द्वारा 2015 में अपनाई गई रणनीति जो ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण पर आधारित है।
  • राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP-AMR): भारत ने 2017 में AMR पर अपनी राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की, जिसमें जागरूकता, निगरानी और संक्रमण नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • लाल लकीर अभियान (Red Line Campaign): भारत सरकार का एक जन जागरूकता अभियान। एंटीबायोटिक दवाओं के पैकेट पर एक ‘लाल खड़ी रेखा’ (Red Vertical Line) यह दर्शाती है कि इन दवाओं को डॉक्टर के पर्चे के बिना नहीं बेचा जाना चाहिए।
  • अनुसूची H1 (Schedule H1): औषधि और प्रसाधन सामग्री नियमों में संशोधन कर 3rd और 4th जनरेशन एंटीबायोटिक्स की बिक्री को विनियमित किया गया है।
  • FSSAI नियम: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने मांस और पोल्ट्री उत्पादों में एंटीबायोटिक अवशेषों की सीमा तय की है।

Analysis: The ‘One Health’ Solution

चुनौतियाँ (Challenges):

  • ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री: कड़े नियमों के बावजूद, भारत में फार्मासिस्ट बिना डॉक्टर के पर्चे के एंटीबायोटिक्स बेचते रहते हैं।
  • बाजार की विफलता: दवा कंपनियों के लिए नई एंटीबायोटिक्स विकसित करना आर्थिक रूप से आकर्षक नहीं है, जिससे नई दवाओं की कमी (“Discovery Void”) हो गई है।
  • निदान का अभाव: कई ग्रामीण क्षेत्रों में यह पता लगाने के लिए प्रयोगशालाएँ नहीं हैं कि संक्रमण बैक्टीरिया से है या वायरस से, जिससे डॉक्टर ‘सुरक्षा के लिए’ एंटीबायोटिक्स लिख देते हैं।

आगे की राह – ‘वन हेल्थ’ (One Health Approach):

AMR केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है। इसका समाधान ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण में निहित है, जो यह मानता है कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और हमारा पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। कृषि, पर्यावरण और स्वास्थ्य मंत्रालयों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

Quick Facts

शब्द/अवधारणा (Term/Concept)

विवरण (Description)

Superbugs

वे रोगाणु जो कई प्रकार की दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो चुके हैं।

Red Line Campaign

डॉक्टर के पर्चे के बिना एंटीबायोटिक्स की बिक्री रोकने हेतु भारत का अभियान।

Colistin

एक ‘अंतिम उपाय’ (Last Resort) एंटीबायोटिक, जिसका उपयोग अब प्रतिबंधित किया जा रहा है।

GLASS

WHO की वैश्विक AMR निगरानी प्रणाली (Global Antimicrobial Resistance and Use Surveillance System)।

Triclosan

साबुन/टूथपेस्ट में पाया जाने वाला रसायन जो AMR को बढ़ावा दे सकता है।

Practice Questions

1. Prelims MCQ:

भारत में ‘रेड लाइन कैंपेन’ (Red Line Campaign) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

(a) यह टीबी के मरीजों की पहचान करने के लिए एक घर-घर अभियान है।

(b) यह एचआईवी/एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए है।

(c) यह लोगों को डॉक्टर के पर्चे के बिना एंटीबायोटिक्स का उपयोग न करने के लिए जागरूक करता है।

(d) यह कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए एक स्वास्थ्य पहल है।

उत्तर: (c)

2. Mains Descriptive Question:

“रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) न केवल एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती भी है।” भारत के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण करें और ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण के महत्व पर चर्चा करें। (15 अंक, 250 शब्द)

Conclusion

जैसा कि हम विश्व रोगाणुरोधी जागरूकता सप्ताह मना रहे हैं, यह समझना महत्वपूर्ण है कि एंटीबायोटिक्स एक सीमित संसाधन हैं। यदि हम इनका संरक्षण नहीं करते हैं, तो हम “पोस्ट-एंटीबायोटिक युग” में प्रवेश कर सकते हैं, जहाँ सामान्य चोटें और संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। यह समय नीति निर्माताओं, डॉक्टरों, किसानों और आम जनता के लिए सामूहिक जिम्मेदारी लेने का है।


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